पिताजी

पिताजी
स्‍व. डॉ. दिनेश चन्‍द्र वाचस्‍पति

सोमवार, 20 जून 2011

' पिता '

‘ पिता ’

हाथों को थाम कर जिनके
मैंने चलना है सीखा ,
गोदी में जिनके सुकून भरा
मेरा बचपन है बीता ,
विशाल हाथों में जिनके
समा जाती थी मेरी नन्हीं-सी मुट्ठी ,
उन ‘पिता’ की स्नेह भरी आँखों में

मैंने स्वयं ईश्वर को देखा !

- सोनल पंवार

0 टिप्पणियाँ:

पोस्ट को पढ़ने के लिये नीचे कृपया लिंक पर क्लिक करें -

About This Blog

  © Blogger template 'Grease' by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP