पिताजी

पिताजी
स्‍व. डॉ. दिनेश चन्‍द्र वाचस्‍पति

सोमवार, 20 जून 2011

' पिता - ईश्वर का वरदान '

‘ पिता – ईश्वर का वरदान ‘

‘पिता’
है ईश्वर का रूप ,
है पावन एक धूप ,
है स्नेह भरा संबल ,
है खुशियों का नभतल ,
है प्यार जिनका अमूल्य ,
है रिश्ता वो अतुल्य ,
है जिनसे मेरी पहचान ,
ईश्वर का वो है वरदान !

- सोनल पंवार

7 टिप्पणियाँ:

Patali-The-Village 20 जून 2011 10:08 pm  

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

डॉ॰ मोनिका शर्मा 20 जून 2011 10:14 pm  

Bahut Sunder.....

चैतन्य शर्मा 20 जून 2011 10:35 pm  

बहुत सुंदर कविता लिखी आपने..... हैप्पी फादर्स डे

G.N.SHAW 22 जून 2011 7:21 pm  

पिता ही हमारे अंकुर हैं !

Manpreet Kaur 23 जून 2011 2:15 pm  

बहुत ही सही बात कही है आपने !आपना कीमती टाइम निकल कर मेरे ब्लॉग पर आए !
डाउनलोड म्यूजिक
डाउनलोड मूवी

mahendra srivastava 23 जून 2011 7:22 pm  

क्या कहूं.. बहुत बढिया। पिता जी को मेरा भी नमन

sonal 25 जून 2011 12:29 am  

धन्यवाद|

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