पहला दिन पहली कविता पहला विचार : करो विचार
उठो उठो जल्दी
चाहे मत उठो
पर उठो सुबह सुबह समय से
पहले दिन ही मत बहाने गढ़ो
पढ़ो फेसबुक स्टेटस समय से
सोए देर से थे, यह बहाना है
सर्दी है तो क्या हुआ नहाना
न नहाना अच्छा नहीं बहाना
पानी शरीर पर खूब है बहाना
थोड़ी कसरत करो, लाइक भी करो
टिप्पणी करो, अपडेट स्टेटस करो
डरो डरो जरूर डरो
कोई डराए चाहे तब मत डरो
भ्रष्टाचार को जीवन में अपनाते हुए
रिश्वत को तेज गति से खाते पीते हुए
फाईल पर वजन रखवाते हुए
चढ़ावा मेज के नीचे से पाते हुए
खाते में काले, माल जमा करवाते हुए
डरो डरो बिना डराए स्वयं से डरो
कर्मन की गति न्यारी रे
पाठ इस मंत्र का डेली करो
कुकर्म से बचो
कर्म डेली अच्छे करो
मन में सच्चे बनो
आओ अच्छे विचार लेकर
सबसे सब समय गले मिलो।
पर उठो सुबह सुबह समय से
पहले दिन ही मत बहाने गढ़ो
पढ़ो फेसबुक स्टेटस समय से
सोए देर से थे, यह बहाना है
सर्दी है तो क्या हुआ नहाना
न नहाना अच्छा नहीं बहाना
पानी शरीर पर खूब है बहाना
थोड़ी कसरत करो, लाइक भी करो
टिप्पणी करो, अपडेट स्टेटस करो
डरो डरो जरूर डरो
कोई डराए चाहे तब मत डरो
भ्रष्टाचार को जीवन में अपनाते हुए
रिश्वत को तेज गति से खाते पीते हुए
फाईल पर वजन रखवाते हुए
चढ़ावा मेज के नीचे से पाते हुए
खाते में काले, माल जमा करवाते हुए
डरो डरो बिना डराए स्वयं से डरो
कर्मन की गति न्यारी रे
पाठ इस मंत्र का डेली करो
कुकर्म से बचो
कर्म डेली अच्छे करो
मन में सच्चे बनो
आओ अच्छे विचार लेकर
सबसे सब समय गले मिलो।


6 टिप्पणियाँ:
बहुत अच्छी कविता........
Behtarin kavita. Sundar Prastuti.
achcha sandesh deti rachna :)
Welcome to मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली
बहुत बढ़िया !
गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आज 26 जनवरी है।
लोग ख़ुश हैं। ख़ुश होने की वजह भी है लेकिन जो लोग आज के दिन भी ख़ुश नहीं हैं उनके पास भी ग़मगीन होने की कुछ वजहें हैं। हमारा ख़ुश होना तब तक कोई मायने नहीं रखता जब तक कि हमारे दरम्यान ग़म के ऐसे मारे हुए मौजूद हैं जिनका ग़म हमारी मदद से दूर हो सकता है और हमारी मदद न मिलने की वजह से वह उनकी ज़िंदगी में बना हुआ है।
हमारे अंदर अनुशासन की भावना बढ़े, हम ख़ुद को अनुशासन में रखें और किसी भी परिस्थिति में शासन के लिए टकराव के हालात पैदा न करें।
जो लोग आए दिन धरने प्रदर्शन करते हुए शासन और प्रशासन से टकराते रहते हैं, उन्हें 26 जनवरी पर यह प्रण कर लेना चाहिए कि अब वे देश के क़ानून का सम्मान करेंगे और किसी अधिकारी से नहीं टकराएंगे बल्कि उनका सहयोग करेंगे।
टकराकर देश को बर्बाद न करें।
लोग अंग्रेज़ो से टकराए तो वे देश से चले गए और आज बहुत से लोग यह कहते हुए मिल जाएंगे कि देश में आज जो असुरक्षा के हालात हैं, ऐसे हालात अंग्रेज़ों के दौर में न थे।
कहीं ऐसा न हो कि फिर टकाराया जाए तो देश और गड्ढे में उतर जाए।
सो प्लीज़ हरेक आदमी यह भी प्रण करे कि अब हम क्रांति टाइप कोई काम नहीं करेंगे।
जो राज कर रहा है, उसे राज करने दो।
एक जाएगा तो दूसरा आ जाएगा।
अपना भला हमें ख़ुद ही सोचना है।
सादर ,
Read entire message :
प्लीज़ क्रांति न करे कोई No Revolution
http://www.ahsaskiparten.blogspot.com/2012/01/no-revolution.html
बहुत अच्छी रचना, हमारे ब्लॉग पर आप आये और हमारी रचना के जनवाणी में प्रकाशन के सम्बन्ध में जानकारी दी उसके लिए कोटिशः धन्यवाद ...
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