पिताजी

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स्‍व. डॉ. दिनेश चन्‍द्र वाचस्‍पति

शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

पकौड़ों को बकरा बना दिया, बरसात में बलि चढ़ा दिया - अविनाश वाचस्‍पति


मानसून आया
या यूं कहें
मौसम आया
गर्मागर्म पकौड़ों का
साथ में लेंगे चाय
या नशे की कोई चीज
अलाय-बलाय

चाय चाहेंगे
तो यहां मिलेंगी
अलाय-बलाय
खुद लानी होगी

मौसम गर्मागर्म
पकौड़ों का
पकौड़े कह रहे हैं
शांति से जी रहे थे
अब फ्राई कर दिया
खूब सारा तेल भर दिया

हम बकरे नहीं है
लेकिन इंसान ने
बरसात का
लेकर बहाना
चढ़ा दिया बलि।

4 टिप्पणियाँ:

Sushil 6 जुलाई 2012 7:24 pm  

बकरे नहीं हो
प्रमाणपत्र दिखाओ
नहीं तो पकौडे़ कुछ
वी पी पी से
हमें भी भिजवाओ।

नुक्‍कड़ 6 जुलाई 2012 7:49 pm  

पिछली बार आपकी डिमांड पर टीचर को टीचर भेजी थी, पावती नहीं मिली है। मिले तो पकौड़े भिजवाएं सुशील जी, यह भी बतलाएं कि चाय भी भेजनी है क्‍या

प्रतिभा सक्सेना 7 जुलाई 2012 6:57 am  

वाह,क्या कल्पना है-पकौड़े और बकरा ,
चमत्कृत हूँ !

M VERMA 7 जुलाई 2012 9:04 am  

साथ में लेंगे चाय
या नशे की कोई चीज

चाय तो रोज पीते हैं अगर .....

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